
मथुरा/सोंख। बाबा कढेरा सिंह विद्या मंदिर में शतरंज प्रतियोगिता का आयोजन उत्साहपूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के चेयरमैन सुरेश सिंह ने दीप प्रज्वलित कर किया। प्रतियोगिता के दौरान विद्यार्थियों के बीच कई रोमांचक मुकाबले देखने को मिले।
इस अवसर पर चेयरमैन सुरेश सिंह ने विद्यार्थियों को शतरंज के इतिहास की जानकारी देते हुए बताया कि भारत में शतरंज की उत्पत्ति के प्रमाण राजा चंद्रगुप्त के काल (280-250 BC) में मिलते हैं। उन्होंने बताया कि पहले पासों के खेल से ऊबने के बाद बुद्धि आधारित खेल के रूप में शतरंज का विकास हुआ। छठी शताब्दी में पारसियों के आगमन के बाद इसे “शतरंज” कहा जाने लगा और बाद में यूरोप पहुंचने पर इसका नाम “चेस” पड़ा।
विद्यालय के प्रबंध निदेशक गौरव सिंह ने कहा कि शतरंज एक अत्यंत रोचक और बौद्धिक खेल है, जिसे दुनियाभर में बड़े शौक से खेला जाता है। उन्होंने विद्यार्थियों को खेल भावना के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
विद्यालय के प्राचार्य देबाशीष सेन ने विजेता प्रतिभागियों को बधाई देते हुए अन्य विद्यार्थियों को भविष्य में और बेहतर प्रदर्शन के लिए अधिक अभ्यास करने की सलाह दी।
प्रतियोगिता के परिणाम
कक्षा 6 : विजेता रतनेश, उपविजेता पार्थ
कक्षा 7 : विजेता आरव, उपविजेता अभय
कक्षा 8 : विजेता आदित्य, उपविजेता कृष्णा
कक्षा 9 : विजेता हिमांशु, उपविजेता गौरांग
कक्षा 10 : विजेता यश शर्मा, उपविजेता मुदित
कक्षा 12 : विजेता गर्वित, उपविजेता विवेक
कार्यक्रम में विद्यालय चेयरमैन सुरेश सिंह, प्रबंध निदेशक गौरव सिंह, प्रबंधक प्रह्लाद सिंह, प्राचार्य देबाशीष सेन, शिक्षा प्रभारी एसवी सिंह, वीरपाल प्रधान, उपप्राचार्य रामबाबू, हेडमास्टर सुरेंद्र सिंह, कोऑर्डिनेटर बिपिन सिंह, डॉ. अशोक, रामबीर, जीएस सदानंद शर्मा, एनसीसी प्रभारी गोविंद सिंह सहित शिक्षक-शिक्षिकाएं और विद्यार्थी उपस्थित रहे।