TMC Bank Accounts Case: कलकत्ता हाई कोर्ट से ममता बनर्जी गुट को बड़ी राहत, फ्रीज बैंक खातों से खर्च की मिली अनुमति

कलकत्ता हाई कोर्ट ने ममता बनर्जी गुट को TMC के फ्रीज तीन बैंक खातों से रोजमर्रा और कानूनी खर्चों के लिए सीमित लेनदेन की अनुमति दी।

टीएमसी बैंक खाते मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट का सांकेतिक दृश्य।
कलकत्ता हाई कोर्ट ने ममता बनर्जी गुट को फ्रीज बैंक खातों से सीमित खर्च की अनुमति दी।

नई दिल्ली/अमर भारती। पश्चिम बंगाल की राजनीति से जुड़े चर्चित बैंक खाता मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस (TMC) गुट को महत्वपूर्ण अंतरिम राहत दी है। अदालत ने पार्टी के तीन फ्रीज बैंक खातों से दैनिक और आवश्यक खर्चों के लिए सीमित वित्तीय लेनदेन की अनुमति प्रदान की है।

अदालत ने स्पष्ट किया कि राजनीतिक दल के नियमित प्रशासनिक और कानूनी खर्चों को पूरी तरह रोकना उचित नहीं होगा। इसलिए न्यायिक निगरानी में सीमित संचालन की व्यवस्था की गई है।

बैंक खाते क्यों हुए थे फ्रीज?

मामले की शुरुआत 18 जून को हुई, जब बिधाननगर पुलिस कमिश्नरेट के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि पार्टी के तीन बैंक खातों का उपयोग कथित रूप से संदिग्ध वित्तीय लेनदेन और अपराध से अर्जित धन रखने के लिए किया गया।

शिकायत के बाद जांच एजेंसियों ने एहतियाती कार्रवाई करते हुए तीनों बैंक खातों को फ्रीज कर दिया था। फिलहाल इस मामले की पुलिस जांच जारी है और आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष आना बाकी है।

रिटायर्ड जज बने स्पेशल ऑफिसर

हाई कोर्ट ने पूरे मामले की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए कलकत्ता हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश सुब्रत तालुकदार को स्पेशल ऑफिसर नियुक्त किया है। अदालत के आदेश के अनुसार, स्पेशल ऑफिसर 30 सितंबर 2026 तक पार्टी के अधिकृत वित्तीय लेनदेन की निगरानी करेंगे। उनका दायित्व यह सुनिश्चित करना होगा कि खातों से केवल न्यायालय द्वारा अनुमत खर्च ही किए जाएं।

कैसे संचालित होंगे बैंक खाते?

अदालत ने विस्तृत प्रक्रिया भी निर्धारित की है। आदेश के अनुसार, पार्टी के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता पहले स्पेशल ऑफिसर के समक्ष चेक प्रस्तुत करेंगे। स्पेशल ऑफिसर की अनुमति मिलने के बाद संबंधित बैंक उन चेकों का भुगतान करेगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जांच प्रभावित न हो और साथ ही राजनीतिक दल के नियमित प्रशासनिक कार्य भी चलते रहें।

किन खर्चों की मिली अनुमति?

हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि बैंक खातों से केवल आवश्यक और नियमित खर्चों की ही अनुमति होगी। इनमें पार्टी के प्रशासनिक खर्च, कर्मचारियों से जुड़े भुगतान, कानूनी मामलों का खर्च तथा स्पेशल ऑफिसर का मानदेय शामिल है। अदालत ने स्पेशल ऑफिसर के लिए 1.25 लाख रुपये प्रति माह मानदेय भी निर्धारित किया है, जिसका भुगतान संबंधित खातों से किया जाएगा।

जांच पर नहीं पड़ेगा असर

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि बैंक खातों के संचालन की अनुमति का अर्थ यह नहीं है कि पुलिस जांच प्रभावित होगी। अदालत ने संबंधित बैंकों को निर्देश दिया है कि खातों के सभी इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, बैंकिंग डेटा और लेनदेन का पूरा विवरण सुरक्षित रखा जाए। साथ ही बैंकों को जांच एजेंसियों के साथ पूर्ण सहयोग करने का निर्देश भी दिया गया है ताकि जांच निष्पक्ष और प्रभावी ढंग से आगे बढ़ सके।

आगे क्या होगा?

फिलहाल यह आदेश अंतरिम राहत के रूप में दिया गया है। मामले की जांच जारी है और आगे की सुनवाई में जांच एजेंसियों की रिपोर्ट तथा अन्य पक्षों की दलीलों के आधार पर अदालत अगला निर्णय लेगी। राजनीतिक और कानूनी दृष्टि से यह मामला महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें एक प्रमुख राजनीतिक दल के वित्तीय संचालन और जांच एजेंसियों की कार्रवाई दोनों जुड़े हुए हैं। अब सभी की नजर आगामी सुनवाई और पुलिस जांच की प्रगति पर बनी रहेगी।

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