
किरावली। प्रदेश सरकार द्वारा सरकारी भूमि और सार्वजनिक तालाबों से अतिक्रमण हटाने के लगातार निर्देश दिए जा रहे हैं, लेकिन तहसील किरावली क्षेत्र के गांव मलिकपुर में पिछले 31 वर्षों से विवादित तालाब पर कब्जा बना हुआ है। मामले को लेकर शिकायतकर्ता पूर्व फौजी ने प्रशासनिक अधिकारियों पर उदासीनता का आरोप लगाते हुए आत्मदाह की चेतावनी दी है।
जानकारी के अनुसार गांव मलिकपुर स्थित तालाब संख्या 227 पर अवैध कब्जे का आरोप करतार सिंह पुत्र राम सिंह पर लगाया गया है। शिकायतकर्ता पूर्व सैनिक रनवीर सिंह पुत्र दरभ सिंह का कहना है कि उन्होंने वर्ष 1985 में इस मामले को लेकर मुकदमा दर्ज कराया था और कई बार तहसील प्रशासन से शिकायत की, लेकिन आज तक कब्जा नहीं हटाया गया।
पीड़ित का आरोप है कि तहसील किरावली में आयोजित विभिन्न संपूर्ण समाधान दिवसों में वह 29 बार शिकायती पत्र दे चुका है। इसके बावजूद प्रशासनिक और राजस्व अधिकारी कार्रवाई करने के बजाय मामले को टालते रहे। उनका कहना है कि आरोपी गाटा संख्या 189 का हवाला देकर अधिकारियों को गुमराह करता रहा, जबकि वास्तविक कब्जा तालाब संख्या 227 की भूमि पर है।
पूर्व फौजी ने आरोप लगाया कि विवादित भूमि पर पक्का मकान बनाकर करीब 1200 वर्ग मीटर क्षेत्र पर कब्जा कर लिया गया है, जबकि सरकारी रिकॉर्ड में तालाब का कुल क्षेत्रफल 1 बीघा 19 बिस्वा दर्ज है। राजस्व विभाग द्वारा पूर्व में किए गए चिन्हांकन को भी कथित रूप से ध्वस्त कर दिया गया।
बताया गया कि तत्कालीन तहसील प्रशासन ने तालाब की सफाई और खुदाई के निर्देश खंड विकास अधिकारी फतेहपुर सीकरी को दिए थे, लेकिन धनाभाव का हवाला देकर कार्य लंबित कर दिया गया।
पीड़ित का आरोप है कि हाईकोर्ट के आदेशों के बावजूद प्रशासन कार्रवाई नहीं कर रहा है और अतिक्रमणकारी को सत्ताधारी दल के एक नेता का संरक्षण प्राप्त है। प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यशैली से नाराज पूर्व फौजी ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द न्याय नहीं मिला तो वह तहसील परिसर में आत्मदाह करने को मजबूर होगा।