पेट्रोल-डीजल खरीद पर नए नियम: 200 लीटर की लिमिट, थोक खरीद पर रोक, जानिए पूरी गाइडलाइन?

केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल की खरीद को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है। जानिए 200 लीटर लिमिट, थोक खरीद पर रोक और नए नियमों का आम लोगों व उद्योगों पर क्या असर होगा।

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राम मंदिर चढ़ावा मामले में दूसरे दिन भी अयोध्या में जांच करती SIT टीम।

नई दिल्ली/अमर भारती। केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल की बिक्री एवं खरीद व्यवस्था को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है। नए निर्देशों के तहत औद्योगिक (Industrial), व्यावसायिक (Commercial) और संस्थागत (Institutional) उपभोक्ताओं के लिए ईंधन खरीद के नियमों में बदलाव किया गया है।सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य आम उपभोक्ताओं के लिए ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करना और जमाखोरी तथा कालाबाजारी जैसी गतिविधियों पर रोक लगाना है।

क्यों लिया गया यह फैसला?

हाल के समय में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। ऐसे में रिटेल और थोक ईंधन कीमतों के बीच अंतर बढ़ने की स्थिति में कुछ बड़े उपभोक्ताओं द्वारा पेट्रोल पंपों से बड़ी मात्रा में ईंधन खरीदने की आशंका जताई गई। सरकार के अनुसार, यदि बड़े उपभोक्ता सामान्य पेट्रोल पंपों से भारी मात्रा में डीजल या पेट्रोल खरीदते हैं, तो आम लोगों और आवश्यक सेवाओं के लिए ईंधन की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए नए प्रतिबंध लागू किए गए हैं।

क्या हैं नए नियम?

1. थोक उपभोक्ताओं पर प्रतिबंध

फैक्ट्रियां, उद्योग, व्यावसायिक संस्थान और बड़े संस्थागत उपभोक्ता अब अपनी जरूरत का ईंधन सामान्य रिटेल पेट्रोल पंपों से नहीं खरीद सकेंगे। उन्हें अधिकृत थोक विक्रेताओं (Bulk Sale Points) से ही ईंधन खरीदना होगा।

2. 200 लीटर प्रतिदिन की सीमा

नए नियमों के तहत किसी भी संदिग्ध खरीदार या वाहन को एक पेट्रोल पंप से एक दिन में अधिकतम 200 लीटर डीजल ही दिया जा सकेगा।

3. प्रमाणित कंटेनर में ही बिक्री

पेट्रोल पंपों पर ईंधन की बिक्री केवल वाहन के मुख्य टैंक या फिर पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) द्वारा अनुमोदित कंटेनरों में ही की जा सकेगी।

4. दोबारा बिक्री पर रोक

पेट्रोल पंप से खरीदे गए ईंधन को आगे मुनाफे के लिए दोबारा बेचने की अनुमति नहीं होगी।

नियम तोड़ने पर क्या होगी कार्रवाई?

यदि कोई व्यक्ति, संस्था या पेट्रोल पंप संचालक इन नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत कार्रवाई की जा सकती है। सरकार ने राज्य प्रशासन को भी जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।

जांच और जब्ती का अधिकार किसके पास?

नियमों के पालन की निगरानी के लिए अधिकृत अधिकारियों को जांच का अधिकार दिया गया है। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित अधिकारी पेट्रोल पंपों का निरीक्षण कर सकते हैं और अनियमितता पाए जाने पर आवश्यक कार्रवाई कर सकते हैं।

आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?

सरकार का कहना है कि इन नियमों का उद्देश्य आम उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता बनाए रखना है। निजी वाहन मालिकों और सामान्य उपभोक्ताओं की नियमित ईंधन खरीद पर इन नियमों का कोई प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं पड़ेगा।

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