यूपी के एमएसएमई को ग्लोबल मार्केट से जोड़ने की तैयारी तेज, जर्मन प्रतिनिधिमंडल से मंत्री भूपेंद्र चौधरी की मुलाकात

‘इंडो-जर्मन गेटवे प्रोग्राम’ से एमएसएमई और स्टार्टअप्स को मिलेगा जर्मनी में कारोबार विस्तार का अवसर

लखनऊ, 2 सितंबर 2026। उत्तर प्रदेश में एमएसएमई और स्टार्टअप्स को वैश्विक बाजार से जोड़ने की दिशा में योगी सरकार की कवायद तेज हो गई है। इसी क्रम में विधानसभा सचिवालय स्थित कार्यालय कक्ष में एमएसएमई मंत्री भूपेंद्र सिंह चौधरी से जर्मनी से आए प्रतिनिधिमंडल ने शिष्टाचार भेंट की। बैठक में उत्तर प्रदेश और जर्मनी के बीच व्यापार, निवेश, तकनीकी सहयोग और एमएसएमई के अंतरराष्ट्रीय विस्तार की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई।

जर्मन प्रतिनिधिमंडल में राउनहाइम के मेयर डेविड रेंडेल, इनोवेशन हब राइन-मेन के सीईओ स्टीफन विट्टेकाइंड, जर्मन इंडियन बिजनेस अलायंस (GIBA) के सीईओ निर्मल रमण कन्नाइयन और चेयरमैन सेल्वकुमार पेरियासामी शामिल रहे।

यूपी में करीब एक करोड़ एमएसएमई इकाइयां

मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश तेजी से एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रदेश में निवेशकों के लिए भरोसेमंद और पारदर्शी कारोबारी वातावरण तैयार किया गया है।

उन्होंने कहा कि देश के कुल एमएसएमई का लगभग 14 प्रतिशत हिस्सा उत्तर प्रदेश में है और प्रदेश में करीब एक करोड़ एमएसएमई इकाइयां कार्यरत हैं। कृषि के बाद एमएसएमई रोजगार उपलब्ध कराने वाला सबसे बड़ा क्षेत्र है। ऐसे में प्रदेश की एमएसएमई इकाइयों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ना आर्थिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

जर्मनी को यूपी से 404 मिलियन डॉलर से अधिक का निर्यात

मंत्री ने बताया कि भारत और जर्मनी के बीच द्विपक्षीय व्यापार करीब 31.01 बिलियन डॉलर है। यूरोपीय संघ को उत्तर प्रदेश के कुल निर्यात में जर्मनी की हिस्सेदारी लगभग 19.8 प्रतिशत है। उत्तर प्रदेश से जर्मनी को प्रतिवर्ष 404.20 मिलियन डॉलर से अधिक का निर्यात होता है।

इसमें रेडीमेड वस्त्र, चमड़ा उत्पाद, फुटवियर, कालीन और ऑटो कंपोनेंट्स प्रमुख हैं। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश का कुल निर्यात करीब 18.2 बिलियन यूरो यानी लगभग दो लाख करोड़ रुपये को पार कर चुका है। प्रदेश देश का पांचवां सबसे बड़ा निर्यातक राज्य बन गया है।

12 महीने का होगा इंडो-जर्मन गेटवे प्रोग्राम

बैठक में ‘इंडो-जर्मन गेटवे प्रोग्राम’ को लेकर भी चर्चा हुई। यह 12 माह का संरचित कार्यक्रम है, जिसे जर्मनी के इनोवेशन हब राइन-मेन और GIBA के सहयोग से संचालित किया जा रहा है।

कार्यक्रम के तहत चयनित एमएसएमई और स्टार्टअप्स को जर्मनी में कानूनी कंपनी स्थापित करने, वहां के बाजार को समझने और विदेशी खरीदारों से सीधे संपर्क स्थापित करने में सहयोग दिया जाएगा। प्रिसीजन इंजीनियरिंग, ऑटोमेशन, इलेक्ट्रिक वाहन, सौर ऊर्जा और रीसाइक्लिंग जैसे क्षेत्रों में संयुक्त परियोजनाओं की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।

वैश्विक विस्तार की क्षमता वाली इकाइयों का होगा चयन

जर्मन प्रतिनिधिमंडल ने उत्तर प्रदेश के मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और कारोबारी माहौल की सराहना की। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि कार्यक्रम के तहत केवल बड़ी कंपनियों पर ध्यान केंद्रित नहीं किया जाएगा, बल्कि स्पष्ट विजन और वैश्विक विस्तार की क्षमता रखने वाली संभावनाशील एमएसएमई इकाइयों और स्टार्टअप्स का चयन किया जाएगा।

प्रतिनिधिमंडल ने उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालयों के साथ सहयोग बढ़ाने और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के माध्यम से व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करने में भी रुचि दिखाई।

जर्मन उद्यमियों को यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो का न्योता

मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने जर्मन उद्यमियों को 25 से 29 सितंबर 2026 तक ग्रेटर नोएडा में आयोजित होने वाले चौथे यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में शामिल होने का न्योता दिया।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश और जर्मनी के बीच यह साझेदारी व्यापार, तकनीक, निवेश और कौशल विकास के क्षेत्र में दीर्घकालिक सहयोग का मजबूत आधार बनेगी। कार्यक्रम के प्रथम चरण में वैश्विक विस्तार की क्षमता रखने वाली एमएसएमई इकाइयों की पहचान की जाएगी।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव एमएसएमई शशि भूषण लाल, विशेष सचिव शिशिर सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।