
किरावली। प्रदेश सरकार की प्रस्तावित ई-स्टांप एवं ई-पंजीकरण प्रणाली के विरोध में अधिवक्ताओं का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। शनिवार को किरावली तहसील के अधिवक्ताओं ने वरिष्ठ अधिवक्ताओं के नेतृत्व में अपर जिलाधिकारी प्रशासन को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपकर प्रस्तावित व्यवस्था पर गंभीर आपत्तियां जताईं। अधिवक्ताओं ने इसे लागू करने से पहले व्यापक विचार-विमर्श की मांग करते हुए सरकार को चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
प्रदेशभर में अधिवक्ताओं की अनिश्चितकालीन हड़ताल के चलते पिछले 11 दिनों से न्यायिक और पंजीकरण संबंधी कार्य प्रभावित हैं। अधिवक्ताओं का दावा है कि इससे सरकार को प्रतिदिन करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। ज्ञापन वरिष्ठ अधिवक्ता मोरध्वज सिंह इंदौलिया, रामवीर सिंह इंदौलिया, जगन प्रसाद अग्रवाल, रामनिवास शर्मा और गजेंद्र इंदौलिया के नेतृत्व में अपर जिलाधिकारी प्रशासन आजाद भगत सिंह को सौंपा गया।
ज्ञापन में अधिवक्ताओं ने प्रस्तावित ई-स्टांप पंजीकरण प्रणाली को “विनाशकारी मॉडल” बताते हुए कहा कि इसके लागू होने से तहसीलों में कार्यरत हजारों स्टांप वेंडर, दस्तावेज लेखक, टाइपिस्ट और अधिवक्ताओं के सहायकों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो जाएगा। उन्होंने सरकार से पूछा कि इन लोगों के भविष्य और आजीविका की सुरक्षा के लिए क्या व्यवस्था की गई है।
अधिवक्ताओं ने ज्ञापन में प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों में लंबे समय से रिक्त पड़े पदों का भी मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि सिंचाई, समाज कल्याण, शिक्षा, आबकारी, लोक निर्माण विभाग, सेल टैक्स और राजस्व विभाग जैसे महत्वपूर्ण विभागों में दशकों से पर्याप्त नियुक्तियां नहीं हुई हैं। इसके बावजूद सरकारी कार्य किसी तरह संचालित हो रहे हैं, ऐसे में नई व्यवस्था लागू करने से पहले आधारभूत समस्याओं का समाधान आवश्यक है।
ज्ञापन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में हुए विकास कार्यों और कानून-व्यवस्था में सुधार की सराहना भी की गई, लेकिन साथ ही सरकार की कुछ नीतियों पर सवाल उठाए गए। अधिवक्ताओं ने युवा अधिवक्ताओं के लिए पांच वर्ष की प्रैक्टिस पूरी करने पर पांच हजार रुपये मासिक सहायता तथा 60 वर्ष से अधिक आयु के अधिवक्ताओं को पांच हजार रुपये मासिक पेंशन देने की मांग की।
अधिवक्ताओं ने केंद्र और प्रदेश सरकार की नीतियों को लेकर भी चिंता व्यक्त की और कहा कि सरकारी विभागों के निजीकरण से रोजगार के अवसर घट रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जनहित से जुड़े मुद्दों पर सरकार ने समय रहते पुनर्विचार नहीं किया तो इसका राजनीतिक असर आगामी विधानसभा चुनावों में देखने को मिल सकता है।
ज्ञापन सौंपने वालों में राजवीर सिंह, महावीर सिंह, गुरवेंद्र सिंह चौधरी, हरेंद्र सिंह, कृष्ण हैड, मुनेश लवानियां, चांद कुरैशी, लोकेंद्र फौजदार, भोगीराम वर्मा, प्रेम सिंह इंदौलिया, नरेश इंदौलिया और रामकुमार श्रीवास्तव सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे।