जम्मू-कश्मीर में पंचायत, BDC और DDC चुनाव एक साथ कराने की तैयारी, ग्रामीण विकास को मिलेगी नई रफ्तार

जम्मू-कश्मीर में पंचायत, BDC और DDC चुनाव एक साथ कराने की तैयारी शुरू हो गई है। चुनाव आयोग पंचायत राज व्यवस्था को मजबूत बनाने और ग्रामीण विकास को गति देने के लिए व्यापक योजना पर काम कर रहा है।

जम्मू-कश्मीर में पंचायत, BDC और DDC चुनाव एक साथ कराने की तैयारी पर बैठक
जम्मू-कश्मीर में पंचायत राज संस्थाओं के चुनाव एक साथ कराने की दिशा में चुनाव आयोग की तैयारी तेज।

नई दिल्ली/अमर भारती। Jammu Kashmir Panchayat Elections को लेकर केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में बड़ी तैयारी शुरू हो गई है। प्रदेश चुनाव आयोग (SEC) पंचायत, ब्लॉक विकास परिषद (BDC) और जिला विकास परिषद (DDC) के चुनाव एक साथ कराने की संभावना पर गंभीरता से काम कर रहा है। आयोग का मानना है कि तीनों संस्थाओं का गठन एक साथ होने से पंचायत राज व्यवस्था अधिक प्रभावी और मजबूत बनेगी। वर्तमान में जम्मू-कश्मीर में पंचायत, बीडीसी और डीडीसी संस्थाएं निष्क्रिय हैं। इनके अधिकारों और प्रशासनिक जिम्मेदारियों का निर्वहन संबंधित ब्लॉक विकास अधिकारी और जिला उपायुक्त कर रहे हैं। ऐसे में Jammu Kashmir Panchayat Elections को जल्द संपन्न कराने की मांग लगातार उठ रही है।

अलग-अलग हुए थे पिछले चुनाव

जम्मू-कश्मीर में अंतिम पंचायत चुनाव नवंबर-दिसंबर 2018 में आयोजित किए गए थे। इसके बाद अक्टूबर 2019 में बीडीसी चुनाव और नवंबर-दिसंबर 2020 में पहली बार डीडीसी चुनाव कराए गए थे। पंचायतों और बीडीसी का कार्यकाल जनवरी 2024 में समाप्त हो चुका है, जबकि डीडीसी का कार्यकाल फरवरी 2026 में पूरा हुआ। प्रदेश में वर्तमान समय में 20 जिले, 285 ब्लॉक, 4,291 सरपंच हल्के, 33,592 पंच पद और 280 डीडीसी निर्वाचन क्षेत्र मौजूद हैं। प्रत्येक जिले में 14 डीडीसी सदस्य चुने जाते हैं। चुनाव आयोग का मानना है कि Jammu Kashmir Panchayat Elections के साथ बीडीसी और डीडीसी चुनाव कराने से प्रशासनिक प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित होगी।

पंचायत राज व्यवस्था को मिलेगा मजबूती का आधार

प्रदेश चुनाव आयोग के अधिकारियों के अनुसार पंचायत राज अधिनियम की मूल भावना यही है कि पंचायत, बीडीसी और डीडीसी संस्थाओं का गठन समन्वित तरीके से हो। यदि तीनों स्तरों पर प्रतिनिधियों का चुनाव एक साथ होगा तो स्थानीय शासन व्यवस्था अधिक प्रभावी ढंग से कार्य कर सकेगी। अधिकारियों का कहना है कि पहले डीडीसी चुनाव अलग परिस्थितियों में आयोजित किए गए थे, लेकिन अब प्रयास किया जा रहा है कि Jammu Kashmir Panchayat Elections के साथ सभी संस्थाओं के चुनाव एक ही प्रक्रिया में संपन्न कराए जाएं। इससे समय, संसाधन और सरकारी खर्च में भी कमी आएगी।

अन्य राज्यों के मॉडल का अध्ययन करेगा आयोग

चुनाव आयोग इस दिशा में विस्तृत अध्ययन कर रहा है। अधिकारियों के एक दल को उन राज्यों में भेजने की तैयारी की जा रही है जहां पंचायत, बीडीसी और डीडीसी जैसी त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था के चुनाव एक साथ कराए जाते हैं। इसके अलावा आयोग जम्मू-कश्मीर सरकार और पंचायती राज विभाग के साथ लगातार संपर्क में है ताकि Jammu Kashmir Panchayat Elections के लिए आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अंतिम रूप दिया जा सके।

डीडीसी क्षेत्रों के परिसीमन की भी उठी मांग

ऑल जम्मू एंड कश्मीर पंचायत कॉन्फ्रेंस के चेयरमैन अनिल शर्मा ने पंचायत राज व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए डीडीसी निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्गठन की मांग की है। उनका कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में आबादी और प्रतिनिधित्व के बीच संतुलन नहीं है। उन्होंने बताया कि कुछ जिलों की आबादी लगभग पांच लाख है और वहां केवल तीन विधायक हैं, जबकि बड़े जिलों में नौ विधायक होने के बावजूद डीडीसी सदस्यों की संख्या समान यानी 14 ही है। ऐसे में Jammu Kashmir Panchayat Elections से पहले डीडीसी क्षेत्रों का परिसीमन या मतदाताओं की संख्या के आधार पर पुनर्गठन आवश्यक है।

पंचायतों के पुनर्विन्यास पर भी जोर

अनिल शर्मा ने पंचायत स्तर पर परिसीमन और मतदाता पुनर्विन्यास की आवश्यकता पर भी बल दिया। उनके अनुसार कई पंचायतों में मतदाताओं की संख्या 4,000 तक पहुंच चुकी है, जबकि कुछ पंचायतों में यह संख्या काफी कम है। उन्होंने सुझाव दिया कि प्रत्येक पंचायत में मतदाताओं की संख्या 1,000 से 1,500 के बीच रखी जाए। जिन पंचायतों में मतदाता संख्या अत्यधिक है, उन्हें विभाजित कर नई पंचायतों का गठन किया जाना चाहिए। इससे Jammu Kashmir Panchayat Elections के बाद सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना अधिक आसान होगा।

ग्रामीण विकास को मिलेगी नई दिशा

विशेषज्ञों का मानना है कि पंचायत, बीडीसी और डीडीसी संस्थाओं के एक साथ गठन से ग्रामीण विकास योजनाओं की निगरानी बेहतर होगी। साथ ही स्थानीय स्तर पर विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ेगी। यदि चुनाव आयोग अपनी योजना को अमलीजामा पहनाने में सफल रहता है, तो Jammu Kashmir Panchayat Elections जम्मू-कश्मीर में पंचायत राज व्यवस्था को नई मजबूती देने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों के समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकते हैं।

यहां भी पढ़ें-

शुभेंदु का एक्शन, टीएमसी की बढ़ी टेंशन! ममता सरकार में मंत्री रहे उदयन गुहा को पुलिस ने दबोचा, बंगाल हिंसा में निभाई भूमिका

बंगाल के बाद महाराष्ट्र अब यूपी में सियासी हलचल तेज, सपा खेमें टूट के संकेत, कौन करेगा इसका नेतृत्व?