PoJK Protest: गुलाम जम्मू-कश्मीर में बढ़ा तनाव, प्रदर्शनकारियों ने लगाए दमन के आरोप

नई दिल्ली/अमर भारती। पाकिस्तान के नियंत्रण वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में इन दिनों हालात तनावपूर्ण बताए जा रहे हैं। स्थानीय संगठनों और आंदोलनकारियों का आरोप है कि संवैधानिक एवं नागरिक अधिकारों की मांग को लेकर चल रहे प्रदर्शनों को बलपूर्वक दबाने की कोशिश की जा रही है। इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित कई वीडियो और संदेशों में लोगों को अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए देखा जा सकता है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
मुजफ्फराबाद मार्च को लेकर बढ़ा विवाद
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, आंदोलनकारियों ने चुनाव बहिष्कार के बाद मुजफ्फराबाद की ओर मार्च निकालने का आह्वान किया था। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सुरक्षा बलों ने मार्च को रोकने के लिए बल प्रयोग किया। कुछ स्थानीय संगठनों ने दावा किया है कि इस कार्रवाई में कई लोग हताहत हुए और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं। हालांकि इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि यह प्रदर्शन क्षेत्र में अधिक राजनीतिक, संवैधानिक और नागरिक अधिकारों की मांग को लेकर किया जा रहा है। दूसरी ओर, पाकिस्तान प्रशासन की ओर से इस संबंध में विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
आंदोलन से जुड़े नेताओं के परिवार भी प्रभावित
ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी से जुड़े नेताओं ने आरोप लगाया है कि आंदोलन से जुड़े कई कार्यकर्ताओं और उनके परिजनों को भी निशाना बनाया गया। संगठन के कुछ प्रतिनिधियों का दावा है कि उनके परिवार के सदस्यों की भी हिंसक घटनाओं में मौत हुई है। इन दावों के बीच सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें लोगों को घायलों को अस्पताल ले जाते और विभिन्न शहरों में विरोध प्रदर्शन करते हुए देखा जा सकता है। हालांकि इन वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि संभव नहीं हो सकी है।
इंटरनेट प्रतिबंध और शिक्षा संस्थानों पर कार्रवाई के आरोप
प्रदर्शनकारियों और स्थानीय संगठनों का आरोप है कि क्षेत्र में इंटरनेट सेवाओं पर प्रतिबंध लगाया गया है, जिससे सूचनाओं का आदान-प्रदान प्रभावित हुआ है। कुछ रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि आंदोलन में शामिल छात्रों और शिक्षाविदों पर कार्रवाई की गई तथा कई शैक्षणिक संस्थानों के पंजीकरण रद्द किए गए। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि ऐसे आरोप सही हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। वहीं प्रशासन का पक्ष पूरी तरह सामने आने का इंतजार किया जा रहा है।
मानवाधिकार संगठनों ने उठाई जांच की मांग
PoJK में सामने आ रहे घटनाक्रम के बीच कुछ मानवाधिकार संगठनों ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (OHCHR) से हस्तक्षेप करने और पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। संगठनों का कहना है कि हिंसा, बल प्रयोग और मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों की निष्पक्ष जांच जरूरी है ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस घटनाक्रम पर नजर रखी जा रही है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि हालात और बिगड़ते हैं तो यह क्षेत्रीय स्थिरता के लिए चिंता का विषय बन सकता है।
वीडियो संदेशों में मदद की अपील
सोशल मीडिया पर प्रसारित कुछ वीडियो संदेशों में स्थानीय लोगों ने गंभीर हालात का दावा किया है। एक युवती ने वीडियो संदेश में आरोप लगाया कि कई परिवार अपने लापता परिजनों का पता नहीं लगा पा रहे हैं। कुछ अन्य वीडियो में महिलाओं और स्थानीय निवासियों को रोते हुए तथा सहायता की अपील करते हुए देखा जा सकता है। इन वीडियो में भारत से मदद की मांग भी की गई है। हालांकि इन संदेशों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है और उनकी प्रामाणिकता की जांच की जानी बाकी है।
क्या है आगे की स्थिति?
आंदोलन से जुड़े नेताओं का कहना है कि उनका संघर्ष जारी रहेगा और मुजफ्फराबाद की ओर बढ़ रहा मार्च आंदोलन को निर्णायक दिशा दे सकता है। दूसरी ओर, मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से निष्पक्ष जांच की मांग लगातार उठ रही है। फिलहाल PoJK की स्थिति को लेकर विभिन्न पक्षों के दावे और आरोप सामने आ रहे हैं। वास्तविक हालात और घटनाओं की पूरी तस्वीर स्वतंत्र जांच और आधिकारिक सूचनाओं के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
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