शिवानंद चौरसिया का शव पहुंचा गांव, अंतिम संस्कार से पहले परिवार ने रखीं 5 बड़ी मांगें

विदेश में जहाज पर कार्यरत शिवानंद चौरसिया की मौत के बाद परिवार ने शव का अंतिम संस्कार रोककर सरकार से आर्थिक सहायता, नौकरी और शहीद का दर्जा देने की मांग की है।

देवरिया के सुरौली गांव में शिवानंद चौरसिया का पार्थिव शरीर पहुंचने पर शोक में डूबे परिजन
विदेश में कार्यरत शिवानंद चौरसिया की मौत के बाद उनका पार्थिव शरीर आठ दिन बाद देवरिया स्थित पैतृक गांव पहुंचा।

नई दिल्ली/अमर भारती। उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के सुरौली गांव में मंगलवार को उस समय मातम पसर गया, जब विदेश में जहाज पर कार्यरत शिवानंद चौरसिया का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव पहुंचा। करीब आठ दिन पहले होरमुज स्ट्रेट क्षेत्र में हुई घटना में उनकी मौत हो गई थी। परिवार को उम्मीद थी कि विदेश में नौकरी कर रहा बेटा जल्द घर लौटेगा, लेकिन जब एंबुलेंस में उसका शव गांव पहुंचा तो पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई।

शव पहुंचते ही गांव में मचा कोहराम

गोरखपुर एयरपोर्ट से एंबुलेंस के जरिए शिवानंद का पार्थिव शरीर गांव लाया गया। शव पहुंचते ही परिजनों की चीख-पुकार से माहौल गमगीन हो गया। गांव के सैकड़ों लोग अंतिम दर्शन के लिए जुट गए। हालांकि अंतिम संस्कार से पहले परिवार ने प्रशासन के सामने पांच प्रमुख मांगें रख दीं और आश्वासन मिलने तक शव उतारने से इनकार कर दिया।

अंतिम संस्कार से पहले परिवार की पांच मांगें

मृतक के पिता रामजी चौरसिया ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए मांग की कि शिवानंद की पत्नी को सरकारी नौकरी दी जाए। इसके अलावा केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार दोनों की ओर से एक-एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाए। परिवार ने दोनों बच्चों की इंटरमीडिएट तक मुफ्त शिक्षा और शिवानंद चौरसिया को शहीद का दर्जा देने की भी मांग की है।

सरकारी मदद की आस में रुका अंतिम संस्कार

परिजनों का कहना है कि शिवानंद परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे और विदेश में रहकर पूरे परिवार का भरण-पोषण करते थे। उनकी असमय मौत के बाद पत्नी और बच्चों के सामने आर्थिक और सामाजिक संकट खड़ा हो गया है। परिवार का कहना है कि सरकार को इस कठिन समय में उनके साथ खड़ा होना चाहिए।

परिजनों ने नौकरी और मुआवजे की मांग उठाई

मामले की गंभीरता को देखते हुए देवरिया के जिलाधिकारी मधुसूदन हुलगी और पुलिस अधीक्षक मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने परिजनों से बातचीत कर उनकी मांगों को शासन तक पहुंचाने का भरोसा दिया। जिलाधिकारी ने कहा कि प्रशासन परिवार के साथ खड़ा है और उनकी ओर से रखी गई सभी मांगों को सरकार के समक्ष भेजा जाएगा।

परिजनों ने नौकरी और मुआवजे की मांग उठाई

डीएम मधुसूदन हुलगी ने बताया कि परिवार की मांग पर शव का पोस्टमार्टम कराया जाएगा। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतिम संस्कार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आर्थिक सहायता और नौकरी से संबंधित मांगों पर शासन स्तर पर निर्णय लिया जाएगा। इस बीच राजनीतिक दलों के नेताओं का भी गांव पहुंचना शुरू हो गया। सलेमपुर से सांसद रमाशंकर राजभर ने परिवार से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी। उन्होंने कहा कि परिवार को कम से कम एक करोड़ रुपये की सहायता, एक सरकारी नौकरी और सम्मानजनक अंतिम संस्कार मिलना चाहिए। उन्होंने इस मुद्दे को संसद में उठाने की भी बात कही।

शिवानंद के परिवार ने सरकार से मांगा न्याय

वहीं भाजपा विधायक सुरेंद्र चौरसिया ने भी परिवार से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की और उनकी मांगों को सरकार तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। दूसरी ओर, शिवानंद के मामा ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि परिवार को यह महसूस होना चाहिए कि सरकार उनके दुख में सहभागी है। फिलहाल पोस्टमार्टम के बाद अंतिम संस्कार की तैयारी की जा रही है, लेकिन सुरौली गांव में चर्चा सिर्फ अंतिम संस्कार की नहीं, बल्कि उस सहायता की भी है जिसकी उम्मीद शिवानंद के परिवार को सरकार से है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार परिवार की मांगों पर क्या फैसला लेती है।

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