कुर्सी की लड़ाई या रणनीतिक बदलाव? कर्नाटक में कांग्रेस का बड़ा फैसला

कर्नाटक की राजनीति में सिद्धरमैया और डीके शिवकुमार के बीच चल रहे टकराव की खबरों को अब विराम मिल गया है. कांग्रेस के लिए दोनों नेताओं को मनाना एक बड़ी चुनौती रही हालांकि पूरे राजनीतिक ड्रामा के बीच ट्विस्ट तब आया जब राज्यपाल मुंबई के लिए रवाना हो गए जबकि 3 बजे के करीब सिद्धरमैया को इस्तीफा देना था. इसके बाद तो सियासी जानकार यहां भी ऑपरेशन लोटस का अनुमान लगाने लगे. सिद्धरमैया को लेकर खबर है कि उन्होने राज्यसभा जाने का प्रस्ताव ठुकरादिया है और वह 2008 से लेकर आगे भी अपने गढ़ वरूणा विधानसभा सीट में सक्रीय रहेंगे.

खैर ऐसा कुछ नहीं हुआ और 28 मई 2026 को मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने अपने आधिकारिक आवास ‘कावेरी’ पर कैबिनेट सहयोगियों के साथ ब्रेकफास्ट मीटिंग बुलाई जिसमें उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार समेत कई मंत्रीगण मौजूद रहे. मीटिंग में सीएम सिद्धरमैया ने साफ कर दिया कि दोपहर 3 बजे वह अपने पद से इस्तीफा दे देंगे साथ ही उन्होनें डीके शिवकुमार को नया मुख्यमंत्री बनाने का प्रस्ताव भी रखा.

सिद्धरमैया के साथ हुई बैठक के दौरान नए सीएम डीके शिवकुमार ने सिद्धरमैया के पांव छूकर उनसे आशीर्वाद लिया. इसके बाद दोनों नेता एक-दूसरे के गले मिले. कांग्रेस की राज्य इकाई ने इन तस्वीरों को सोशल मीडिया पर कांग्रेस में अंदरखाने सबकुछ ठीक है का संदेश दे दिया. सिद्धरमैया ने अपने इस्तीफे को लेकर साफ किया कि यह फैसला हाईकमान यानी मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी के निर्देश पर लिया गया है.

आपको बता दें कि वर्ष 2023 विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस ने ढाई-ढाई साल के पावर-शेयरिंग फॉर्मूले को अपनाया था. सिद्धरमैया अहिंदा और ओबीसी का मज़बूत चेहरा माने जाते हैं वहीं दूसरी ओर डीके शिवकुमार वोक्कालिगा समुदाय के मज़बूत नेता के तौर पर देखे जाते हैं. चुनाव जीतने के बाद कांग्रेस में डीके शिवकुमार के सीएम बनने को लेकर अटकलें तेज़ हो गई थीं लेकिन मामला अटक गया था. इसके बाद पॉवर शेयरिंग का फॉर्मूला तय हुआ और सिद्धरमैया को मुख्यमंत्री बनाया गया.

पिछले कई दिनों से राजनितिक सरगर्मिया तेज़ थीं कि कर्नाटक में कांग्रेस के अंदर सबकुछ ठीक नहीं है और नेतृत्व परिवर्तन की सुगबुगाहट दिखने लगी. कई दिनों से दोनों गुटों के बीच तनाव की खबरें भी सामने आ रही थीं। हालांकि मामला बिगड़ने से पहले हाईकमान ने दोनों को दिल्ली बुलाकार बैठक की और सिद्धरमैया को राज्यसभा सीट और पार्टी में महत्वपूर्ण राष्ट्रीय भूमिका ऑफर की गई.

डीके शिवकुमार आक्रामक रणनीतिकार के तौर पर जाने जाते हैं और कांग्रेस को जिताने में उनकी भूमिका काफी अहम मानी जा रही थी. वर्ष 2019 से ही वे पार्टी को मज़बूत करने में जुटे रहे और एक ताकतवर चेहरे के तौर पर उनका नाम सामने आया. उनकी ताकत वोक्कालिगा वोट बैंक, सगठन को मज़बूत करना और जुझारूपन की राजनीति माना जाता है.

कहते हैं दूध का जला छाछ फूंक-फूंक कर पीता है. कांग्रेस भी यही कर रही है. पिछली गलतियों से सबक लेकर वह किसी शीर्ष नेता को नाराज़ किए बिना साथ ही पूरे संगठन को भी मज़बूत करनेकी ओर अग्रसर है. कांग्रेस हर स्तर पर अपने आपको मज़बूत करना चाह रही है यही वजह है वो ऐसे युवा और आक्रामक चेहरों को लाना चाहती है जिससे कांग्रेस युवा और आक्रामक छवि को पेश कर सके. ये बदलाव आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर किया गया है.

भारतीय जनता पार्टी सिद्धरमैया और डीके शिवकुमार के बीच टकराव को कुर्सी की लड़ाई बता रही है वहीं कांग्रेस इसे एकजुटता का संदेश बता रही है. फिलहाल इंतजार है गवर्नर से मुलाकात के बाद. गवर्नर से मुलाकात के साथ ही डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री के पर काबिज हो जाएंगे. फिलहाल इस घटना से कांग्रेस के फायदे-नुकसान का आंकलन अभी लगाना जल्दबाजी होगा.