
रिपोर्ट: वाराणसी | प्रवेश सिंह
वाराणसी । कचहरी परिसर स्थित विशेष न्यायाधीश (SC/ST एक्ट) सुधाकर राय की अदालत में शनिवार को चर्चित बनारस क्लब भूमि विवाद मामले की सुनवाई के दौरान नया मोड़ सामने आया। ‘द बनारस क्लब लिमिटेड’ की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विशाल सिंह अदालत में उपस्थित हुए और प्रार्थी जितेंद्र कुमार तिवारी द्वारा दाखिल प्रार्थना-पत्र की प्रति उपलब्ध कराने की मांग की।
बचाव पक्ष ने अदालत में कहा कि बिना दस्तावेजों और साक्ष्यों का अध्ययन किए मामले की पोषणीयता (Maintainability) पर प्रभावी बहस संभव नहीं है। अधिवक्ता विशाल सिंह ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि याचिका के साथ कोई ठोस साक्ष्य संलग्न नहीं किए गए हैं। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अगली सुनवाई की तिथि 5 जुलाई 2026 निर्धारित की है।
जमीन कब्जा और फर्जी दस्तावेजों का आरोप
मामले में प्रार्थी अधिवक्ता जितेंद्र कुमार तिवारी ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 379 के तहत प्रार्थना-पत्र दाखिल कर बनारस क्लब लिमिटेड के वर्तमान और पूर्व पदाधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। याचिका में कहा गया है कि कैंट थाना क्षेत्र के ग्राम पहड़पुर स्थित बेशकीमती जमीनों पर क्लब द्वारा अवैध कब्जा किया गया है।
प्रार्थी का दावा है कि वर्ष 2011 में नगर मजिस्ट्रेट वाराणसी की अदालत क्लब को बेदखल करने का आदेश दे चुकी है, बावजूद इसके कथित रूप से प्रशासनिक प्रभाव और रसूख का इस्तेमाल कर न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित किया गया।
कोर्ट को गुमराह करने का आरोप
याचिका में आरोप लगाया गया है कि अदालत में मूल दस्तावेजों के स्थान पर कथित रूप से हेरफेर की गई फोटोस्टेट प्रतियां और भ्रामक शपथ-पत्र प्रस्तुत किए गए। साथ ही निबंधन कार्यालय के रिकॉर्ड और इंडेक्स में भी कथित हेरफेर का आरोप लगाया गया है।
इसके अतिरिक्त कंपनी रजिस्ट्रार (ROC) कानपुर के समक्ष संस्था की सदस्यता और वित्तीय लेनदेन से जुड़े संदिग्ध प्रपत्र दाखिल करने का भी उल्लेख किया गया है।
5 जुलाई को होगी अहम बहस
शनिवार की सुनवाई में बचाव पक्ष द्वारा दस्तावेजों की प्रति मांगने के बाद अदालत ने मामले को अगली तिथि के लिए स्थगित कर दिया। अब 5 जुलाई 2026 को इस हाई-प्रोफाइल मामले में याचिका की पोषणीयता और आरोपों के आधार पर दोनों पक्षों के बीच विस्तृत कानूनी बहस होने की संभावना है।